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इस फूल को देख प्रसन्न हुईं थी द्रोपदी, इससे दूर भागते हैं भूत-प्रेत

इसे हिमालयी फूलों का सम्राट भी कहा गया है। यह कमल आधी रात के बाद खिलता है इसलिए इसे खिलते देखना स्वप्न समान ही है। एक विश्वास है कि अगर इसे खिलते समय देख कर कोई कामना की जाए तो अतिशीघ्र पूरी हो जाती है। ब्रम्हकमल का अर्थ है ब्रम्हा का कमल। इसे मां नंदा का प्रिय पुष्प माना जाता है।

ये कहानी है प्रचलित
इस दुर्लभ पुष्प की प्राप्ति आसानी से नहीं होती। विशेषकर उत्तराखंड, उत्तरी म्यांमार तथा दक्षिण -पश्चिम चीन इसके उत्पत्ति स्थान हैं। ब्रह्म कमल से कितनी ही कहानियां जुड़ी हैं। उनमें एक यह है कि जब पांडव अज्ञातवास पर गए तो द्रौपदी उनके साथ थीं। द्रौपदी मानसिक रूप से बेहद अशांत थीं क्योंकि वह कौरवों द्वारा मिले अपमान के आघात से अत्यंत दु:खी थीं। घने जंगल के कष्टों से वह और भी परेशान थीं। इसी दौरान एक संध्या को उन्होंने झरने के पानी में एक सुंदर सुनहरा कमल बहते देखा। द्रौपदी के सामने ही वह कमल खिल गया। इसे देख कर द्रौपदी बहुत प्रसन्न हुईं। यह प्रसन्नता दैवी और अलौकिक थी, परंतु क्षणिक ही थी। अचानक कमल जैसे खिला था, वैसे ही मुरझा भी गया। यह एक संकेत था कि द्रौपदी के दु:खों का यहीं अंत नही था। इस कहानी से इस कमल को रहस्यमय कहा जा सकता है जो भविष्य का संकेत देता है।

भागती हैं बुरी आत्माएं
यह पूर्णिमा की रमाना जाता है कि ब्रम्हकल को तोडऩे के सख्त नियम हैं। इससे बुरी आत्माएं भी दूर भागती हैं। ये पुष्प केवल साल में एक बार ही एक रात के लिए खिलता है। आधी रात तक ये पूरा खिल जाता है और सुबह तक मुरझा जाता है। ब्रम्हकमल का जीवन सिर्फ से 5 से 6 माह ही होता है। धार्मिक मान्यता के चलते लोगों की इसमें खासी आस्था है।

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