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बड़े-बड़े लड़ाकों को चुटकियों में पटक देती हैं 79 वर्षीय मीनाक्षी अम्मा

सच है इस देश में हुनर की कमी नहीं, वह कभी छिपा हो सकता है, किसी भी उम्र में उसे ढूंढा जा सकता है। ये सच साबित कर दिखाया है एक 79 वर्षीय महिला ने।साड़ी पहनकर तलवारबाजी करना आसान नहीं होता है लेकिन मीनाक्षी पिछले 69 सालों से तलवारबाजी की कला कलरीपायट्टू का अभ्यास कर रही हैं। कलरीपायट्टू को भारतीय मार्शल आर्ट भी कहा जाता है। वे इस कला की सबसे उम्रदराज टे्रनर हैं जो पिछले 57 वर्षों से टे्रनिंग दे रही हैं। वे 60 वर्ष की उम्र तक बेंगलूरु और चेन्नई आदि शहरों में कलरीपायट्टू का सार्वजनिक प्रदर्शन करती थीं।

आज भी वे रोजाना 2-3 घंटे अभ्यास करती हैं। केरल में जन्मी मीनाक्षी के पिता ने उन्हें सात साल की उम्र में ही कलरीपायट्टू सिखाना शुरू किया था। उस समय इस कला को कम ही लड़कियां सीखती थीं। उन्होंने तबसे अपना पूरा जीवन इसके लिए समर्पित कर दिया। वे कहती हैं कि जब सात साल की थीं तो नृत्य सीख रही थीं।

बॉडी में लचक न होने के कारण पिताजी इन्हें सिखवाने लगे जो बाद में शौक बन गया। वे कदाथानानंद कालारी संगम स्कूल में हर वर्ष करीब 150 युवाओं को इसेे सिखाती हैं। अब तक वे करीब दस हजार से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दे चुकी हैं। इस टे्रनिंग स्कूल की स्थापना उनके पति वीपी राघवन गुरुक्कल ने वर्ष 1949 में की थी। मीनाक्षी की गुरुक्कल से 17 वर्ष की आयु में शादी हुई थी। तबसे ही वे इसकी ट्रेनिंग दे रही हैं।  कलरीपायट्टू की सबसे उम्रदराज टे्रनर मीनाक्षी को उनकी कला-लगन के लिए हाल ही पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।

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