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पहली बार यहां हुआ था मां सरस्वती का अवतरण, खतरनाक है रास्ता

अब तक आपने अनेक चमत्कारी स्थान देखें होंगे, जहां देवों का वास है। कई तरह की मान्यताएं भी इन स्थानों से जुडी हैं लेकिन आज हम आपको ऐसे आलौकिक स्थान दिखा रहे हैं जिनका महत्व विद्यापाणि मां सरस्वती से जुडा है…

धरती पर ज‌िस स्‍थान को देवी सरस्वती के प्रगट होने की बात पुराणों में कही गई है वह स्थान उत्तराखंड में है जो इन द‌िनों बर्फ की चादरों से ढका हुआ है। यह स्थान भगवान विष्णु का दूसरा न‌िवास यानी दूसरा बैकुंठ भी कहलाता है।

उत्तराखंड में यह द‌िव्य स्‍थान चीन की सीमा के करीब है। खूबसूरत पहाड़‌ियों के बीच बसा यह स्थान ऐसा है जहां से पांडवों ने स्वर्ग की यात्रा की थी और महर्ष‌ि वेद व्यास जी ने यहां पर महाभारत की रचना की थी। यहां इन घटनाओं की भी आप झलक पा सकते हैं।

यह पव‌ित्र स्थान माना गांव में है जो बद्रीनाथ से करीब 3 क‌िलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां से देवी सरस्वती का नदी रूप में उद्गम भी है और यहां इनका एक मंद‌िर भी है। जो इस बात को दर्शाता है क‌ि गंगा, यमुना और सरस्वती के बीच हुए व‌िवाद के कारण उन्हें नदी के रूप में प्रगट होना पड़ा था। इस कथा का ज‌िक्र श्रीमद्भागवत और विष्णु पुराण में भी म‌िलता है।

ये है देवी सरस्वती का मंद‌िर जो द‌िखने में तो काफी छोटा है लेक‌िन इसका महत्व बहुत बड़ा है। कहते हैं इस मंद‌िर के दर्शन मात्र से देवी सरस्वती के दर्शन का पुण्य प्राप्त होता है।

यहां सरस्वती नदी के ऊपर एक बड़ी सी श‌िला है ज‌िसे भीम श‌िला कहते हैं। इस श‌िला को भीम ने स्वर्ग यात्रा के दौरान उठाकर यहां रखा था ताक‌ि वह सरस्वती नदी को पार कर द्रौपदी समेत स्वर्ग जा सकें। तस्वीर में आप इस श‌िला को देख सकते हैं।

यहां सरस्वती नदी मे आपको एक और अद्भुत दृश्य देखने को म‌िलेगा। नदी की धारा पर जब सूर्य की रोशनी पड़ती है तो सामने इंद्र धनुष के सातों रंग नजर आते हैं। कहते हैं यह सात सुर हैं जो देवी सरस्वती की वीणा के तारों में बसे हैं।

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