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तालाब खुद गया लेकिन नहीं मिले बजरंगबली के पैर, जंगल में मिली ये मूर्ति

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से 110 किलोमीटर दूर है यह अनोखी प्रतिमा। गंजबासौदा से 19 किमी दूर उदयपुर के पास हनुमान जी की यह अनोखी प्रतिमा प्राचीन मंदिर में स्थापित है। खासियत यह है कि प्रतिमा आधी लेटी हुई मुद्रा में है प्रतिमा के एक पैर का छोर कहां है, यह आज तक पता नहीं चल सका।

प्रतिमा के एक पैर का पता लगाने मंदिर के सामने इतनी खुदाई की गई कि वहां तालाब बन गया, लेकिन हनुमान जी के पैर का अंतिम छोर नहीं मिल सका। नूरपुर गांव के वीरान क्षेत्र में मौजूद हनुमान जी का मंदिर विख्यात होने के साथ बहुत ही दुर्लभ प्रतिमा वाला है। यहां हमेशा भगवान राम के चरणों में बैठे रहने वाले हनुमान राम जी के नहीं, बल्कि माता जानकी के चरणों में बैठे हैं।

जिस जगह मंदिर है, वहां कोई बस्ती नहीं है। पहले यहां घना जंगल हुआ करता था और वन में ही महावीर हनुमान विराजे थे। पद्मासन मुद्रा में बैठी यह 65 फीट ऊंची प्रतिमा दूर से ही लोगों को दर्शन देने लगती है। गंजबासौदा के पास सिरनोटा गांव में 2006 में स्थापित इस विशाल प्रतिमा पर सिन्दूरी रंग सजा है।

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