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विरोध नहीं करती तो वह जिंदा होती, पढ़ें निर्भया कांड के आरोपी ने क्या कहा

नई दिल्ली। कुत्सित मानसिकता वक्त के बदलने पर भी नहीं बदलती। निर्भया कांड और दोषियों के बयानों इसे एक बार फिर सही साबित कर दिखाया है। निर्भया गैंगरेप केस के दोषियों की मानसिकता किस तरह की थी, इसका अंदाजा एक रेपिस्ट के बयान से लगाया जा सकता है। जेल में बंद एक दोषी मुकेश सिंह ने एक डॉक्युमेंट्री में कहा था- “अगर रात में लड़कियां निकलेंगी तो ऐसी घटनाएं होंगी। रेप के लिए आदमी से ज्यादा वह जिम्मेदार होगी।” बता दें कि 16 दिसंबर, 2012 की रात दिल्ली में चलती बस में निर्भया से 6 लोगों ने गैंगरेप किया था। बस मुकेश चला रहा था। मारपीट और बस से फेंके जाने की वजह से निर्भया गंभीर रूप से घायल हो गई थी। सिंगापुर में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस केस के चारों दोषियों मुकेश सिंह, अक्षय ठाकुर, विनय कुमार और पवन गुप्ता की फांसी की सजा बरकरार रखी है।

सॉरी मम्मी!
निर्भया की मां कहती हैं, “आखिरी बार जब हम हॉस्पिटल में मिले तो उसने हाथ में हाथ पकड़ा। कहा- सॉरी मम्मी! मैंने आपको बहुत तकलीफ दी। आय एम सॉरी। आखिरी बार घर से गई थी तो हाथ हिलाकर उसने कहा था- बाय मम्मी! मैं दो-तीन घंटे में लौट आऊंगी। उसका उस दिन घर से निकलना आज भी आंखों में दिखता है। जब हम दिल्ली से सिंगापुर जाने से पहले रात को उससे मिले। उसने कहा कि इतने दिन हो गए यहां। उसने भाई से कहा कि हमें घर ले चलो। वो जितने दिन अस्पताल में थी, सोती नहीं थी। कहती थी कि आंख बंद करो तो मम्मी हमेशा लगता है कि मेरे पैरों के पास या बगल में कोई खड़ा है। मैं पास बैठती थी हाथ पकड़कर, तब वो सो पाती थी।”

पिछले साल बीबीसी की डॉक्युमेंट्री ‘इंडियाज डॉटर’ को दिए इंटरव्यू में दोषी मुकेश बोला था, “आप एक हाथ से ताली नहीं बजा सकते। कोई भी शरीफ लड़की रात में नौ बजे घर के बाहर नहीं घूमेगी। उस हालत में एक लड़की रेप के लिए लड़के से कहीं ज्यादा जिम्मेदार होती है। लड़के और लड़की एक नहीं हो सकते। घर का काम और घर में रहना लड़कियों का काम है, वे रात में बार, डिस्को कैसे जा सकती हैं? भद्दे कपड़े पहनकर गलत काम करती हैं। केवल 20 पर्सेंट लड़कियां ही अच्छी होती हैं।”

विरोध नहीं करती तो जान नहीं जाती
मुकेश ने कहा था, “मैंने 15-20 मिनट गाड़ी चलाई थी। लाइटें बंद कर दी थीं बस की। मेरा भाई था मेन (मुख्य अपराधी)। लड़के (निर्भया के दोस्त) को मारा। लड़की चिल्लाती रही- बचाओ, बचाओ। हम उसे मारपीट कर पीछे ले गए। हम आ-जा रहे थे… बारी-बारी से। लड़की विरोध नहीं करती तो उसकी जान नहीं जाती। यदि वह लड़की और उसका दोस्त बिना कुछ कहे ऐसा होने देते तो हमारा गैंग उन्हें मारता-पीटता नहीं। लड़की को घटना का विरोध नहीं करना चाहिए था। यदि वह विरोध नहीं करती तो हम घटना के बाद उसे उसके घर तक छोड़ते और केवल उसके दोस्त को ही मारते।”

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