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प्रेमजाल बिछाकर पकडा, 6 टुकडों में मिली थी इस महिला की लाश

एक वैहशी ने हंसता खेलता परिवार उजाड़ दिया। बेकसूर महिला को सिर्फ इसलिए मौत के घाट उतार दिया क्योंकि वह उसे अच्छी लगती थी। शहर के नाले के पास मिली एक लाश, 6 टुकड़ों में कटी हुई..बोरे में बंधी हुई। तफ्तीश में पता चला यह लाश कविता रैना की है। ये  लाश एक मां की है जो स्कूटी से अपने बच्चों को लेने स्कूल बस के स्टॉप तक गई थी।

इंदौर।  कविता रैना हत्याकांड इंदौर की चर्चित मर्डर मिस्ट्री है। जिस किसी ने उस रोज कविता की लाश देखी थी, वो हफ्तों तक सो नहीं पाया था। हत्यारे ने कविता के शरीर के 6 टुकड़े किए और प्लास्टिक बैग में भरकर नाले में फेंक दिया था। आसपास के रहवासी घटना से सकते में आ गए थे। इस केस में मंगलवार को विशेष न्यायालय में सुनवाई हुई। कोर्ट के समक्ष भंवरकुआं थाने के उपनिरीक्षक सूर्यनाथ पांडे ने अपने दर्ज कराए।

उपनिरीक्षक सूर्यनाथ पांडे ने अदालत में कहा 28 अगस्त 2015 को तीन इमली चौराहा बीट संभालने वाले आरक्षक मनोज ओझा को पुलिया के पास भीड़ लगी हुई दिखाई दी थी, वहां जाने पर उसे दो बोरो में लाश दिखाई दी। इस पर वह तत्काल थाने आया और मुझे इसकी जानकारी दी थी। पांडे ने बताया, सूचना मिलते ही मैंने इसकी जानकारी आला अधिकारियों और एफएसएल टीम को दी थी। इसके बाद सीधे तीन इमली चौराहे की पुलिया के पास गया। वहां देखा दो बोरे में लाश थी, एक में महिला के हाथ पैर थे ,जबकि दूसरे में धड़ था। सिर पर गंभीर चोट के निशान दिखाई थे। हाथ पर ऊं, राम और कविता लिखा हुआ था। इसकी सूचना प्रसारण के लिए कंट्रोल रूम पर दी गई थी। इसके बाद लाश को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा और मौके नक्शा बनाया था। इसके बाद जिन बोरों में लाश मिली थी, उसकी अधिकृत जब्ती की थी।

मंगलवार को अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए आवेदन पर भी बहस हुई, शासन ने इस मामले में तत्कालीन एसडीएम, नोडल अधिकारी, पीएम करने वाले डॉक्टर और आरोपी महेश बैरागी के खिलाफ लिखी तीन रिपोर्ट को कोर्ट में पेश करने की मांग की थी। आवेदन पर बहस होने के बाद कोर्ट ने 4 फरवरी को अगली सुनवाई के आदेश दिए हैं।

प्लास्टिक बैग में 6 टुकड़ों में लाश मिलने के बाद पुलिस ने इस केस में हाथ-पांव मारने शुरू किए, लेकिन हत्यारे के गिरेबान तक पहुंचने में नाकामयाब रही। पूरे 107 दिन तक पुलिस क्राइम की इस गुत्थी को सुलझाने के लिए भिड़ी रही, लेकिन सिरा हाथ नहीं लगा। फिर अगली सुबह बड़ी सफलता मिली। मित्रबंधु नगर में रहने वाले निजी कंपनी के कर्मचारी संजय रैना की पत्नी कविता रैना की हत्या पर सहानूभूति पीडि़त परिवार के साथ थी और सभी चाहते थे कि आरोपी जल्द पकड़ लिए जाए। घटनास्थल भंवरकुआं थाने में था, लेकिन क्राइम ब्रांच के साथ ही देहात के थानों की टीम भी अपने-अपने हिसाब से जांच करती रही। सारे काम छोड़कर तकनीकी जांच में दक्ष अफसर व उनकी टीम का काम सिर्फ कविता रैना हत्याकांड के खुलासे का था। शुरुआत में हत्याकांड की हर जांच पर आम लोगों तक की नजर थी।

 घुमाता रहा हत्यारा
अफसर शुरुआत से ही दावा कर रहे थे कि आरोपी जल्द गिरफ्त में होगा, लेकिन लोगों का सब्र जवाब देने लगा था। लोग सड़कों पर उतर्कार न्याय के लिए लड़ाई लड़ रहे थे। आखिरकार 108 दिन बाद आरोपी महेश बौरासी पकड़ा गया। यह वही आरोपी है जो हत्या के पांच दिन बाद से ही पुलिस की नजर में था। हालांकि सबूत पुख्ता नहीं थे। डीआईजी संतोषकुमार सिंह व एएसपी विनयप्रकाश पॉल की टीम पूरे समय महेश बैरागी पर नजर रखे रही।

पुलिस ने इश्क का बिछाया जाल
कविता रैना हत्याकांड में भले ही पुलिस को आरोपी तक पहुंचने में 108 दिन लग गए लेकिन यह प्रोफशनल पुलिसिंग का एक बड़ा उदाहरण साबित हुआ है। पुलिस ने हत्याकांड की जांच में ऐसे कदम उठाए, जो अब तक सिर्फ सोचे ही जाते थे। सबसे पहले पुलिस ने तीन संदेहियों को चिन्हित किया और फिर महिला पंटर से दोस्ती करवाई। एक चपेट में नहीं आया तो उसको उसी के घर में अघोषित रूप से बंधक बनाकर पूछताछ की। इसके लिए 18 दिन पुलिस टीम ने उज्जैन में डेरा डालकर रखा। कई अफसर भी मानते है कि उनके सेवाकाल में यह ऐसा पहला केस है जिसे सुलझाने के लिए हर उपाय व हत्थकंडे का इस्तेमाल हुआ।

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